औषधीय गुणों से भरपूर सरसों।।

  • वजन कम करने के लिए फायदेमंद सरसों।।।
  • सरसों के तेल के इस्तेमाल से पाएं घने लंबे और काले बाल।।
  • डायबिटीज में मददगार सरसों का तेल।।।
  • कैंसर की रोकथाम में फायदेमंद सरसों का तेल।।।
  • सरसों के तेल की मसाज माइग्रेन की समस्या को रखे दूर ।।
  • अस्थमा और दमे में फायदेमंद सरसों का तेल ।।।
  • गठिया अर्थराइटिस के रूप में फायदेमंद सरसों।।
  • शरीर के अन्य दर्द को कम करने में फायदेमंद सरसों का तेल।।
  • सूजन को कम करने में सरसों के तेल की मालिश है असरदार।।

सरसों के तेल एवं उसके इस्तेमाल से होने वाले फायदे।।


सरसों कई वर्षों से औषधिय और खाने में प्रयोग की जाती है, इसके बीजों में कैल्शियम,मैग्नीशियम,ओमेगा 3 फैटी एसिड,आयरन,जिंक,प्रोटीन और फाइबर अधिक मात्रा में पाया जाता है। गर्म तेल में सरसों के बीजों को डालकर तड़का लगाया जाए तो सब्जी में एक अलग तरह का स्वाद आता है। सरसों अपनी अलग-अलग किस्म में उपलब्ध है, जैसे काली सरसों,सफेद सरसों,भूरे रंग की सरसों और भारतीय सरसों इत्यादि।सरसों का तेल हमारी त्वचा के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है,क्योंकि इसका सेवन हमारे शरीर में गर्मी पैदा करता है। सरसों के बीजों में एक सेलेनियम नामक पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता है,जो हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है। सरसों के पौधे की जड़ों का रस भी बहुत फायदेमंद है,इस रस को शरीर पर लगाने से कई तरह की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है, जैसे कैंसर,जोड़ों के दर्द घुटने के दर्द आदि। इसके बीजों के लगातार सेवन से गठिया और मांसपेशियों के दर्द मे बहुत जल्द राहत मिलती है। सरसों का इस्तेमाल हमारे दैनिक जीवन में आज से नहीं बल्कि बरसों से होता चला आ रहा है। सरसों के प्रयोग से कैंसर, माइग्रेन, अस्थमा, कमर दर्द जैसे रोगों में भी फायदा होता है।भारत में मूंगफली के बाद सरसों दूसरी सबसे महत्वपूर्ण तिलहन की फसल है। जो ज्यादातर राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश,उत्तरप्रदेश,बिहार,उड़ीसा, पश्चिम बंगाल और असम में उगाई जाती है। इसमें पीले फूल लगते हैं,जो तने और शाखाओं के ऊपरी भाग में उपस्थित होते हैं। सरसों की खेती सर्दियों के मौसम में की जाती है इसके पत्ते का उपयोग (साग) सब्जी के रूप में किया जाता है।मक्के की रोटी और सरसों का साग पंजाब प्रांत का मुख्य भोजन माना जाता है। सरसों का साग ठंड के समय खाना बहुत ही ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। क्योंकि सरसों की तासीर गर्म होती है। इसीलिए यह हमारे शरीर को गर्मी प्रदान करती है।

भारत में सरसों के बीजों का इस्तेमाल ज्यादातर रसोइयों में स्वाद बढ़ाने व मसाले के तौर पर किया जाता है। सरसों के बीज से बनने वाले तेल का उपयोग आमतौर पर खाना पकाने के लिए किया जाता है। वही सरसों के बीज का उपयोग सब्जियों में तड़का लगाने,अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने साथ ही अचार का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सरसों के औषधि गुण कई प्रकार के हैं जिनकी वजह से सरसों का उपयोग ब्यूटी प्रोडक्ट के साथ साथ कई रोगों की दवाइयां बनाने में किया जाता है।

वजन कम करने के लिए फायदेमंद सरसों।।।


सरसों का बीज वजन को कम करने में फायदेमंद साबित होते हैं।आप इसका सेवन पाउडर के तौर पर करें या फिर अपने भोजन में सरसों के तेल का इस्तेमाल करें। दोनों ही तरह से उपयोग करने पर वजन कम करने में मदद मिलेगी। सरसों के बीज में बी कॉन्प्लेक्स विटामिन जैसे थियामिन और राइबोफ्लेविन होते हैं। जिससे बॉडी का मेटाबॉलिज्म अच्छा बना रहता है, मेटाबोलिज्म अच्छा बने रहने से शरीर का वजन कम करने में मदद मिलती हैं।

सरसों के तेल के इस्तेमाल से पाएं घने लंबे और काले बाल।


सरसों का तेल बालों के लिए रामबाण औषधि है। सरसों के तेल की मालिश करने से सिर में ब्लड का सरकुलेशन बढ़ता है।जिससे बालों को बढ़ने में मदद मिलती है। सरसों के तेल में विटामिन,खनिज और बीटा कैरोटीन आदि तत्व पाए जाते हैं। इसके साथ ही इसमें फैटी एसिड,आयरन, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि भी भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। घने, काले और लंबे बाल चाहिए तो हफ्ते में कम से कम तीन से चार बार सरसों के तेल की मालिश जरूर करें। इससे बालों की ग्रोथ तो अच्छी होती ही है साथ ही शरीर का ब्लड सरकुलेशन भी बढ़ता है। सरसों का तेल समय से पहले बाल सफेद हो जाने की समस्या को कम करके के साथ साथ पुनः आपके बालों को काला करने में मदद करता है। सरसों के बीज बालों के लिए नेचुरल कंडीशनर का काम भी करते हैं।

डायबिटीज में मददगार सरसों का तेल।।।


सरसों के बीज डायबिटीज जैसी बीमारी से भी छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं।सरसों के बीज में एंटीऑक्सीडेंट तत्व मौजूद होते है।

कैंसर की रोकथाम में फायदेमंद सरसों का तेल।।।


सरसों के बीज में कैंसर को रोकने वाले गुण होते है यह कैंसर वाले ट्यूमर और गांठ के साथ कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है। सरसों में फाइटोन्यूट्रिएंट्स भी पाया जाता है जो पेट के कैंसर को रोकने में मदद करता है। रोजाना सरसों खाने से कैंसर होने की आशंका भी कम हो जाती है। सरसों का तेल गाढ़ा होने और विटामिन ई के उच्च स्तर के कारण यह तेल सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों और अन्य प्रदूषकों के खिलाफ हमारी त्वचा की रक्षा करता है जिससे स्किन कैंसर होने का खतरा कम रहता है।

सरसों के तेल की मसाज माइग्रेन की समस्या को रखे दूर ।।


आजकल कई लोग माइग्रेन की समस्या से ग्रसित है। माइग्रेन का दर्द इतना भयंकर होता है जिसे सहन करना बहुत मुश्किल होता है। यह दर्द कभी-कभी सिर के आधे हिस्से में होता है तो कभी-कभी पूरे सिर में भी होने लगता है। ऐसे में सरसों का तेल इस दर्द को कम करने में रामबाण औषधि के रूप में काम करता है। क्योंकि इसमें मौजूद मैग्नीशियम माइग्रेन की समस्या को कम करने में मदद करता है। सिर पर, सरसों के तेल की मालिश हफ्ते में तीन से चार बार करने से सिर दर्द में बहुत आराम महसूस होता है।

अस्थमा और दमे में फायदेमंद सरसों का तेल ।।।


सरसों के बीज में मैग्नीशियम काफी मात्रा में पाया जाता है, जो एंटीइन्फ्लेमेटरी होते हैं सरसो के बीजों को रोज खाने से अस्थमा के मरीज को सांस की बीमारी से राहत मिलती है। सरसों, सर्दी जुखाम को ठीक करने और सीने में जमे बलगम को बाहर निकालने में भी मदद करती है। सरसों मांसपेशियों की सक्रियता और फेफड़ों की कार्य क्षमता को बढ़ाकर अस्थमा की वजह से होने वाली सांस में तकलीफ को रोकने में मदद करता है। सरसों की तासीर गर्म होती है सर्दियों में इसका इस्तेमाल ज्यादातर किया जाता है। जिससे कफ सर्दी जुकाम आदि की समस्याओं से भी निजात पाया जा सकता है।

गठिया अर्थराइटिस के रूप में फायदेमंद सरसों।।


गठिया यानी अर्थराइटिस में घुटनों, हाथ व शरीर के अन्य जोड़ों में दर्द होता है। इंसान को चलने फिरने में भी काफी मुश्किल होती जाती है। ऐसे में सरसों के बीज या तेल का इस्तेमाल काफी राहत प्रदान करता है। खासतौर पर अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों को सरसों के तेल की मालिश जरूर करनी चाहिए। घुटने व जोड़ों में दर्द के दौरान सरसों के तेल से मालिश की सलाह दी जाती है,क्योंकि सरसों का तेल, जोड़ो के दर्द को कम करने में बहुत मदद करता हैं। सरसों के तेल में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है,जो रूमेटाइड अर्थराइटिस मे आराम पहुंचाता है।

शरीर के अन्य दर्द को कम करने में फायदेमंद सरसों का तेल।।।


सरसों का तेल कई तरह के दर्द को कम करने में मददगार हैं। जैसे कान,पैर,कमर,घुटने में दर्द हो या जोड़ों मे दर्द।अगर कान में दर्द हो रहा हो तो सरसों के तेल में दो या तीन लहसुन की कली डालकर तेल को अच्छी तरह से गर्म कर ले, गुनगुना रहने पर रुई के द्वारा दो बूंद कान में डाल लें, जिससे कान के दर्द में काफी राहत महसूस होती है। पैरों के तलवे में होने वाले दर्द को भी ठीक करने के लिए सरसों के बीज को पीस लें और इसे गुनगुने पानी में मिला लें, फिर पानी मे अपने पैरों को 15 मिनट के लिए डूबा कर रखें, ऐसा करने से आप के तलवों में होने वाले दर्द जल्द ही ठीक हो जाएगा। कमर के दर्द में भी सरसों का तेल रामबाण है। सरसों के तेल को अजवाइन और लहसुन मिला कर गर्म करें। फिर गुनगुने तेल को कमर पर लगाकर हल्के हाथों से मालिश करें,तो ककमर के दर्द में तुरंत राहत मिलती है।और जोड़ों के दर्द में भी यह काफी मददगार साबित होता है। सिर मे दर्द हो या फिर माइग्रेन की शिकायत इसमें भी सरसों के तेल की मालिश काफी फायदेमंद होती है। एड़ी फटने या किसी भी टाइप की ठंड में होने वाली समस्याओं से बचने के लिए मोमबत्ती एवं सरसों के तेल को गर्म करके मिक्स करके फटी एड़ियों में लगाने से भी एड़िया तुरंत ही ठीक होने लगती है।

सूजन को कम करने में सरसों के तेल की मालिश है असरदार।।


यदि किसी को सूजन की समस्या है, तो सरसों के तेल की मालिश से सूजन में जल्द आराम मिलता है। सरसों का तेल निमोनिया जैसी बीमारी में छाती में हो जाने वाली सूजन को कम करने में भी मदद करता है। गठिया के दर्द में ,सरसों के तेल में दो से तीन लहसुन की कलियां डालकर गर्म करें तथा तेल गुनगुना हो जाने पर प्रभावित अंग पर लगाने से जोड़ों के दर्द और घुटनों के दर्द में जल्द आराम मिलता है।